सपने हर कोई देखता है, कोई बड़ा बनने का सपना तो कोई आसमान छूने का सपना।मेरा भी है इक सपना। दुनिया को ये बताने का, मेरी भी एक पहचान है, जिसमें बसती मेरी शान है।जिंदगी के हर मोड़ पर लोगों ने गिराया, पर उठना किसी एक ने सिखाया।गिर कर उठना ही तो जिंदगी है, जिसमें बहुत सारी खुशी छिपी है।खुशी मिली तो बहुत से सपने संजोए,उन सपनों को पाने में बहुत से अपने खोए।मंजिल मिली तो कोई किनारा ना मिला,डूबते रहे पर कोई सहारा ना मिला।सपने तो देखे, जिनमें अपनों को भी देखा।जब खुली आँख तो अपनों से ही मिला धोखा।हुई खता जो सपनों पर किया भरोसा,ये सोचकर बार-बार ये दिल रोता।दिल को समझाया क्यों तू रोता,इस धरती पर ना कोई अपना होता।इंसान है तू अपनी फितरत मत छोड़, सपने तू देख इनसे मुँह मत मोड़।।
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ReplyDeleteमुझे अच्छा लगेगा
धन्यवाद