Thursday, 8 September 2011

मौत सिर्फ आतंकियों की जुबानी


दिल्ली दिल वालों की....दिल्ली मेरी जान... ये तो सभी बड़े शान से कहते हैं, जो सभी को अपने में समेटने का दम रखती है...यहां आकर हर कोई आसानी से बस जाता है...दिल्ली से हर किसी का दिल से नाता जुड़ जाता है...और अगर इसी दिल को कोई चोट पहुंचाए तो कितना दर्द होता है...दर्द ऐसा जो रात की नींद और दिन का चैन छीन ले....दिल्ली में धमाकों का कहर जारी है...धमाका ऐसा जो कई मासूमों को मौत की नींद सुला देता है...इन धमाकों ने अबतक कई हजार लोगों की जान ली....ये कोई नहीं जानता जो आज घर से निकला है वो शाम को घर लौटेगा भी या नहीं....इन धमाकों ने उन मासूमों को मौत की नींद सुलाया जिनकी किसी से कोई दुशमनी नहीं थी....

जाने कितने मासूम मौत की नींद सो गए
कल तक जो अपने थे आज सपने हो गए
एक धमाके ने कितना कुछ तबाह कर दिया
ये देखकर मेरा दिल आंसूओं से भर गया
मौत हुई उन बेगुनाहों की,जिनका कोई कसूर ना था
आतंकियों ने सिर्फ अपने मनसूबे को अंजाम दिया था
धमाका हुआ वक्त वहीं थम गया
इसी बीच एक मासूम अपनी माँ से लिपट गया
और बोला माँ मुझे उठाले
अपनी गोद में सुला ले
माँ बोली बेटा तू तो सिर्फ मेरा है
पर क्या करें देश को आतंकियों ने घेरा है
माँ कहती बेटा मौत तो एक दिन आनी है
पर आज मौत सिर्फ आतंकियों की मेहरबानी है

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