आते-जाते खुबसूरत आवारा सड़कों पे, कभी कोई इत्तीफाक से कितने अन्जान मिल जाते हैं....उनमें से कुछ लोग भूल जाते हैं, कुछ याद रह जाते हैं.....................
किसी ने सच ही कहा है, हमें जिन्दगी के किस मोड़ पर कब कौन मिल जाए कुछ नहीं कह सकते।उनमें से कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो हमारी जिन्दगी का हिस्सा बनकर हमारे साथ रहते हैं और कुछ जो हवा के झौंके की तरह होते हैं, जो जिन्दगी में आते तो हैं, पर जाते -जाते अपना नामोनिशान तक मिटा जाते हैं।
आते हैं मुसाफिर, जाते हैं मुसाफिर..जाना ही है फिर क्यूं आते हैं मुसाफिर
ये भी सच है, पर जो आया है उसे जाना ही है,फिर क्यों हमें उनके जाने का दुख रहता है।हमें दुख तो होता है पर हमारे दुख का अहसास भी किसी-किसी को होता है...और ऐसे इंसान दुनियां में बहुत कम होते हैं,पर मैं हूं कौन जो किसी से शिकायत करूं..क्यूं मैं किसी से उम्मीद लगाऊं, क्यूं मैं किसी से कहूं के तुम मेरे हो । ( क्योंकि मैं भी एक इंसान हूं और इंसान की फितरत ही ऐसी होती है )
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